संघर्षी जीवन



 आओ संघर्षों की बात करें

स्ट्रगल लाइफ

जिंदगी की धूप और छांव की बात करें

खाली हाथ और फ़टे पांव की बात करें

जीने की जंग में मुश्किलें थी बहुत 

कुछ पल के लिए तो संघर्षो की बात करें....


सांसे थम रही थी कदम भी रुक गए थे

जो चीरते थे पर्वत वो बदन भी थक गये थे

रुक गई थी धरती और थम गयी थी हवा

जम गया था दरिया खामोश थी फिजायें......


रुकी हुई हर धारा,आओ बहाव की बात करें

समंदर को चीरती थी,उस नांव की बात करें

जीने की जंग में मुश्किलें थी बहुत 

कुछ पल के लिए तो संघर्षो की बात करें....


हाथों में थे बन्धन कांधे पर बोझ लिए 

चल रहे थे सभी वही पुरानी सोच लिए

न मंजिल थी न रास्ते की खबर थी

पैर लाचार और बोझिल थी नजर

बिखरे थे ख्वाब सम्भला कुछ नहीं

हड्डियां गलकर भी बदला कुछ नहीं...


शहर आगे निकल चुके थे गांव की बात करें

बहुत हो चुका अब सुझाव की बात करें

जीने की जंग में मुश्किलें थी बहुत 

कुछ पल के लिए तो संघर्षो की बात करें...


भीड़ थी किस्मत जगाने वाले अभिनेताओ की 

नियत को पहिचाने

कुकरमुत्तों की तरह नेता उगते रहे

महापुरुषों के पीछे हम भी चलते रहे

भूखी जनता की मेहनत पर हरामखोर पलते रहे..


जब हमने हक मांगा आश्वासन पूरा मिला

राशन पूरा मिला नहीं भाषण तो पूरा मिला

हवाई चप्पल वालों को जो हवा में ले जाते थे

भाषणों से ही हमेशा वो सपने दिखाते थे...


नफरत न गर्मी न ताव की बात करें 

वक्त नहीं की हर पल नेताओं की बात करें

जीने की जंग में मुश्किलें थी बहुत 

कुछ पल के लिए तो संघर्षो की बात करें...


राजतन्त्र न कर पाया गणतंत्र वो कर गया

भीड़ के पैरों तले लोकतंत्र भी मर गया

विकास नालों में बहा इरादे पूरे न हुए 

पीढ़ियाँ गुजर चुकीं वादे पूरे न हुए...


वक्त न बिताओ अब सुनहले सपनो में

कुछ तो मेहनत करो जीवन मे  


जख्म थे दिलों में उस घाव की बात करें 

उदास था चेहरा उस भाव की बात करें 

जीने की जंग में मुश्किलें थी बहुत 

कुछ पल के लिए तो संघर्षो की बात करें


बेबसी की भाषा थी गमों का था साया

बहुत कुछ बयां होता गर दर्द की जुबां होती

आंसुओं को पोछने की गर रवायतें जवां होती

तस्वीर कुछ अलग होती तकदीर भी जुदा होती


नफ़रतें दिलों में, कोई मेल अब बाकी नहीं

बुझते हुए दियों में तेल अब बाकी नहीं 

जंग का मैदान बन चुकी थी जिदगी 

खेलते थे मिलकर वो खेल अब बाकी नहीं


कृष्ण के घर की गुजिया 

सलमान के घर की भुजिया

लाला के घर का पानी 

और पप्पू की बिरयानी


घर से फिर निकलो, साथ आओ की बात करें

हांडी पर पकते गरम पुलाव की बात करें

जीने की जंग में मुश्किलें थी बहुत 

कुछ पल के लिए तो संघर्षो की बात करें


जिंदगी की धूप और छांव की बात करें

खाली हाथ और फ़टे पांव की बात करें

जीने की जंग में मुश्किलें थी बहुत 

कुछ पल के लिए तो संघर्षो की बात करें

कुछ पल के लिए तो संघर्षो की बात करें


-शंकर नाथ🌿🌿📝📝

टिप्पणियाँ

बेनामी ने कहा…
संघर्ष जीवन ही जीवन है

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