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जिंदगी की सीख

सीधी सरल नहीं है जिंदगी  कभी उतार तो  कभी चढ़ाव देखे हैं जिंदगी में कभी प्यार तो कभी नफरते मिली है जिंदगी में कभी भटके तो,  कभी लड़खड़ाई है जिंदगी कभी मिली है खुशियां ढेरों तो कभी ख्वाब बिखर गए जिंदगी में कभी लगता है हसीन है जिंदगी  कभी लगता है...........  गमों का साया है जिंदगी मे कभी रूलाया तो कभी हंसाया है जिंदगी ने कभी प्यासा था तो कभी अमृत पिलाया है जिंदगी ने कभी संघर्षो मे उलझा तो कभी सफलता दिलाई है जिंदगी ने कभी डांट फटकार तो कभी रस्ता दिखाया है जिंदगी ने कभी तिरस्कार,अनादर तो कभी सामाजिक बनाया है जिंदगी ने कभी भागमभाग थी जिंदगी तभी कर्म-प्रधान बनाया जिंदगी ने कभी यौवन मे था मदमाता तभी प्यार की सरसता दी है जिदंगी ने सुख-दुख की तुला है जिन्दगी तभी मानवता सिखलाई  है जिंदगी ने

संघर्षी जीवन

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संघर्षी जीवन आओ संघर्षों की बात करें जिंदगी की धूप और छांव की बात करें खाली हाथ और फ़टे पांव की बात करें जीने की जंग में मुश्किलें थी बहुत  कुछ पल के लिए तो संघर्षो की बात करें.... सांसे थम रही थी कदम भी रुक गए थे जो चीरते थे पर्वत वो बदन भी थक गये थे रुक गई थी धरती और थम गयी थी हवा जम गया था दरिया खामोश थी फिजायें...... रुकी हुई हर धारा,आओ बहाव की बात करें समंदर को चीरती थी,उस नांव की बात करें जीने की जंग में मुश्किलें थी बहुत  कुछ पल के लिए तो संघर्षो की बात करें.... हाथों में थे बन्धन कांधे पर बोझ लिए  चल रहे थे सभी वही पुरानी सोच लिए न मंजिल थी न रास्ते की खबर थी पैर लाचार और बोझिल थी नजर बिखरे थे ख्वाब सम्भला कुछ नहीं हड्डियां गलकर भी बदला कुछ नहीं... शहर आगे निकल चुके थे गांव की बात करें बहुत हो चुका अब सुझाव की बात करें जीने की जंग में मुश्किलें थी बहुत  कुछ पल के लिए तो संघर्षो की बात करें... भीड़ थी किस्मत जगाने वाले अभिनेताओ की  नियत को पहिचाने कुकरमुत्तों की तरह नेता उगते रहे महापुरुषों के पीछे हम भी चलते रहे भूखी जनता की मेहनत पर हरामखोर पलते रहे.. ...

जीवन क्या है और कैसे जिए

 जीवन बह रहा है।  हर कण हर क्षण बह रहा है,  हर कण अपना स्वरूप भी परिवर्तित कर रहा है। सब कुछ गतिमान है।  कुछ भी स्थिर नहीं है।  हम जो अभी हैं इस पल,  इस क्षण में जो हम हैं वो अगले ही पल में नहीं होंगे। हमारा हर अंग बदल रहा है। हमारे सारे तंतु, हमारी सारी कोशिकाएं लगातार बदल रहीं हैं। हमारी सोच, हमारे विचार भी परिवर्तित हो रहे हैं। हम क्या हैं, हम कौन हैं, हर अगले क्षण ही इसका उत्तर अलग अलग होगा। हम जो देख रहें हैं, जो कुछ भी हम सुन रहें हैं। वो सब हमें प्रभावित करके हमें परिवर्तित कर रहा है।  नदी बह रही है,  मेघ बरस रहे हैं,  बादल गरज रहे हैं,  डमरू का डम डम नाद गूंज रहा है,   जीव अपनी भौतिक आयु प्राप्त कर रहे हैं, प्राणी अपनी शक्ति को साध रहे हैं। यही अविरल है। यही सनातन है।गति ही सत्य है। गति ही चिरंतन है। जो है वो नहीं रहेगा और जो है नहीं वो हो जाएगा। सब कुछ बदल जाएगा। हर्ष, भय, प्रीत, कष्ट कुछ भी नहीं रहेगा। अगले क्षण ही सब कुछ परिवर्तित हो जाएगा। हमारी इन्द्रियां जो देख रहीं है,  हम जो सुन रहें हैं, जो स्पर्श कर रहें ...

जैसी करनी-वैसी भरणी

जैसी करनी-वैसी भरणी सुल्तानपुर मे वर्षो नौकरी करने के बाद बाबूजी राजकीय सेवा से सेवानिवृत हुए और पति-पत्नी दोनो अपने जीवन की शेष बची जिंदगी खुशी-खुशी से काट रहे थे की एक दिन बाबूजी के जीवन मे बहुत बडा़ वज्रपात हो गया और बाबूजी की पत्नी का देहांत हो गया।बाबूजी बहुत दुखी हुए। पत्नी के अंतिम संस्कार के बाद पति पुरी तरह टूट्ट चुका था और तेरहवीं के बाद रिटायर्ड बाबू जी(शिक्षा विभाग) गाँव छोड़कर दिल्ली में अपने पुत्र अमित के बड़े से मकान में आये हुए हैं। अमित बहुत मनुहार के बाद यहाँ ला पाया है। यद्यपि वह पहले भी कई बार प्रयास कर चुका था किंतु अम्मा ही बाबूजी को यह कह कर रोक देती थी कि 'कहाँ वहाँ बेटे बहू की ज़िंदगी में दखल देने चलेंगे। यहीं ठीक है। सारी जिंदगी यहीं गुजरी है और जो थोड़ी सी बची है उसे भी यहीं रह कर काट लेंगे। ठीक है न!'  बाबूजी ने कभी भी अम्मा जी की बात को नकारा नही केवल अम्मा जी की बात रखने के लिए... बस बाबूजी की इच्छा मर जाती। पर इस बार कोई साक्षात अवरोध नहीं था और पत्नी की स्मृतियों में बेटे के स्नेह से अधिक ताकत नहीं थी इसलिए बनवारी(बाबूजी) दिल्ली आ ही गए हैं। अमित एक ...

जिंदगी अभी अधूरी है

जिंदगी अभी अधूरी है  इसको पूरा करना जरूरी है  संघर्षो में चलना मजबुरी है  यही तो जिंदगी की असली धूरी है सुख-दुख इसके राही हैं सफलता इसका भाई है स्नेह उसकी परछाई है नयनों मे दीपक सा जलता है पलको पर तरंगिणी सी बहती है सफलता के प्यासे सपने मे कदमो मे ताकत जरुरी है लक्ष्य की मजबूती अभी अधूरी है जीवन को सफल बनाना जरुरी है तकरारो की दिवारो को तोड़ो ईर्ष्या की राहों को छोड़ो प्रेम के धागों को जोड़ो जिंदगी को सफलता की तरफ मोड़ो              📕शंकर नाथ,वरिष्ठ अध्यापक 

जिंदगी की ख्वाहिश

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आहिस्ता चल ए जिंदगी,अभी   शिक्षा की अलख जगाना बाकी है    शिक्षक हूं..... शिक्षक का फर्ज निभाना बाकी है  भारत भूमि पर जन्मा हूं  भारत मां का कर्ज चुकाना बाकी है  आहिस्ता चल ए जिंदगी, अभी  शिक्षा की अलख जगाना बाकी है  जन-जन की ख्वाहिशें अभी अधूरी है  अधूरी पड़ी ..... ख्वाहिशों को पूरा करना जरूरी है  गरीबी में पला बढ़ा हूं  गरीबी को मिटाना बहुत अभी जरूरी है  आहिस्ता चल ए जिंदगी,अभी  शिक्षा की अलख जगाना बाकी है  मां के आंचल में पला बढ़ा हूं  मां के दूध का फर्ज निभाना बाकी है  आहिस्ता चल ए जिंदगी,अभी   शिक्षा की अलख जगाना बाकी है अनपढ़,निरक्षर को,अभी  ज्ञान का दीप जाना बाकी है  आहिस्ता चल ए जिंदगी,अभी  शिक्षा की अलख जगाना बाकी है  युवा का सपना अभी अधूरा है  अधूरे सपनों को पूरा करना बाकी है  आहिस्ता चल ए जिंदगी अभी  शिक्षा की अलख जगाना बाकी है

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