राबड़ी

 ताती    लुआं   चालंण   लागी

दादी    राबड़  माँगण    लागी


मोठ   बाजरो    चून   घोलगै

माऊ   राबड़   रांदण   लागी


कुलड़ी गै म्हा खड़बड़ खड़बड़

खाटी   लासी     पाटण   लागी


बाँध  कापड़ौ    धरी  सिरहाणै

सोरम    सुणि   आवण   लागी


जीरो   कूट   प्याज    मिलायो

मु  स्यु   लारां  टपकण  लागी


भरयो     गिलास  ठाडौ   ठाडौ

काया    सारी   झुझण    लागी


सरणाटो   सो   मचग्यौ   भाया

आपी   आँख्या   मिचण  लागी


लू     तावड़ौ    लागै     कोनी

गर्मी    दूर    भाजण    लागी


जद    स्यु    घरां  रदैं   राबड़ी

दादी    काचा   काटण   लागी


दादो कैवे सुण रै डावड़ी 

ज्यादै महाने थोड़ी राबड़ी


दादी नै मानी दादै री मनुवार

दादो पिये राबड़ी भरगे थाली चार


​शहरूं सु आया मेहमान भी भाया,

कोल्ड-ड्रिंक री बोतल भूल ही आया।


देख राबड़ी रो ठंढो कुल्हड़,

जीभलड़ी नै चाटण लागी।

ताती लुआं चालंण लागी...


​एसी-कूलर सब पड़ गया फीका,

जब मिल ग्या राबड़ी का चिका।


पेट री आग बुझावै पल में,

भूख-प्यास सब भागण लागी।

माऊ राबड़ रांदण लागी...


बिना मिलावट देसी अमृत,

पीवै जिको ही हो जावे तृप्त।


डोकरा-डोकरी, टाबर-टोली,

मूंछों पै राबड़ लावण लागी।

आपी आँख्या मिचण लागी...


DHERDESAR NEWS

टिप्पणियाँ

बेनामी ने कहा…
कविता घणी चोखी लागी मायड भाषा तो चार चाँद लगा दिना
Rakesh ने कहा…
राबड़ी गो एक सबड़को, तेर भीतर मार्यो फड़को । ई टेम गी तो आ ही है दवाई, आ तो भाया जबर बताई।।
बेनामी ने कहा…
Bahut achhi kavita hai gramin khana paan pe

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