संदेश

शिक्षा-जगत लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शिक्षक दिवस

चित्र
हमारी सृष्टि की संरचना करने में देवों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है- ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता,विष्णु पालनहार और महेश को सृष्टि का संहारक कहा जाता है। मनुष्य को इस संसार में जीवनयापन करने के लिए आध्यात्मिक और भौतिक दोनों तरह से जीवन यापन करना पड़ता है।आध्यात्मिक स्वरूप को आगे बढ़ाने के लिए उसको एक आध्यात्मिक गुरु की आवश्यकता रहती है और इस भौतिकवादी युग में आगे बढ़ने के लिए एक शिक्षक की आवश्यकता रहती है आज का युग भौतिकवादी युग है अतः अपने जीवन निर्वाह के लिए निजी व्यवसाय,उद्यम कला-कौशलता में निपुणता प्राप्त करने के लिए एक श्रेष्ठ गुरु की आवश्यकता रहती है उस आवश्यकता की पूर्ति के लिए एक सच्चे,संस्कारवान,दया-भावी, परोपकारी और सहिष्णुता शिक्षक की आवश्यकता रहती है प्राचीन काल में बालक बड़ा होने पर गुरुकुल आश्रम में शिक्षा ग्रहण के लिए भेज दिया जाता था। 25 वर्ष की आयु तक ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करते हुए शिक्षा ग्रहण करते थे और उसके बाद ग्रहस्थ जीवन में आते थे ।आश्रम में रहते हुए शिष्य गुरु की सेवा- सुरक्षा करता था ।प्राचीनकाल में शिक्षा का स्वरूप मौखिक था  जब से लेखन सामग्री का...

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पाथेय

राबड़ी

कितना स्वार्थी है मानव