संदेश

ऋतु-वर्णन लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

श्रावणी-बेला

मेघा आए दूर से  आकाशा मंडराय  रिमझिम रिमझिम बरसे मेघ तृप्त धरा हरसाय  कृषक बोए खेत को  हीरा मोती प्रकटाए  बदरा बरसे खेत में  हरियाली बढ़ जाए  झूम उठे चिंतित कृषक भी जब  श्रावणी बूंद गिर जाए  चमक उठे हर चेहरा भी जब  श्रावणी घटा चहु दिसि छाए  बूंद पड़े जब बगिया में  हर कलियां हरषाय  पीक-शिखी के मुग्ध मौन मे    श्रावणी मधु बस जाए चहुदिशी नृत्य हरषित शिखी का  सतरंगी नृत्य दिखाय श्रावण है श्रृंगार धरा का  कली-कली खिल जाए मेघा बरसे जोर से जब  धरा मंद-मंद मुस्काए  अमृत बूंद के मिश्री घोल से  वातावरण रसीला हो जाए शंकर नाथ (व.अध्यापक,हिंदी)

शीत-ऋतु

चित्र
शीत-ऋतु थी,कंपकंपता प्रदेश पल-पल कंम्पित प्रकृति-परिवेश बर्फिली हवा की रफ्तार चुबती सकल संसार बढता धुंध का गुब्बार चकित जनसमुह बार-बार करता जन-जन हाहाकार था हिमालय भी कुपित बढता बर्फ का विस्तार अपने शीत-पिड़ित-दृग फार लपेटे लाव-लश्कर किरणे सहित चकित दिनकर भी दक्षिण मे प्रस्थान शिशिरांशु की चन्द्रिका शीतल शीतज्वर सा शीतकर को चहुदिशी शीतलता प्रखर शीततरंग है भूतल पर मणिक सरिस बुन्दे ओस की विस्तारित सकल भूतल पर स्वर्णिक बुन्दे है फसल रबी पर शीत से पिड़ित जन है, कुंठित मन-बदन  अलाव से तपता तन है, निगौड़ी शीत  मनुज पर रख प्रीत....🖋🖋 Shankar nath

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पाथेय

राबड़ी

कितना स्वार्थी है मानव