पति का दुख
सोचा था कि शादी करके,
जीवन सुख से बीतेगा।
रोज़ शाम को गर्म समोसा,
और कड़कड़ाती चाय मिलेगी।
पर किस्मत ने पासा ऐसा फेंका,
कि सपने सारे टूट गए।
घर में बेलन ऐसे घूमा,
सारे तेवर छूट गए!
मिसरी जैसी वाणी जिनकी,
शादी के बाद तलवार हुई।
रोटी थोड़ी काली क्या की,
सीधे जंग की शुरुआत हुई!
सोमवार को शॉपिंग लिस्ट,
मंगलवार को ताने हैं।
बुधवार को मम्मी जी के,
पुराने वही अफ़साने हैं।
रविवार का दिन आता है,
सोचता हूँ आराम करूँ।
तभी आवाज़ आती है पीछे से—
"चलो, पोछा लगाओ, मैं बर्तन साफ़ करूँ!"
अब तो बस इतनी आरज़ू है,
ईश्वर कोई चमत्कार दिखाए।
मेरी बीवी को एक दिन के लिए,
शांति का मतलब समझ आ जाए!
मैं प्रेम का पिपासु हु
पर पत्नी को कोई प्रेम का मतलब समझाये
मैं मनुहार का भूखा हूं
पर पत्नी को कोई आत्म सत्कार का कोई अर्थ बताए
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