शिक्षा और संस्कार
शिक्षा और संस्कार
शिक्षा अगर रोशनी है,तो संस्कार आधार है,
बिना दिशा के ज्ञान का,बहता व्यर्थ बुखार है।
अक्षर का ज्ञान पाकर,जब बुद्धि मुस्कुराती है,
संस्कारों की छांव में,संस्कृति रंग लाती है।
जो केवल पढ़-लिख गया,वो मुकाम पाता है,
पर जो संस्कारी बना,इतिहास रचाता है।
डिग्रियों का बोझ लेकर,चलना तो आसान है,
विनम्रता जो सीख ले,वही बड़ा इंसान है।
शास्त्रों का ज्ञान हो,या आधुनिक विज्ञान हो,
मुख पे हो मिठास सदा,मन में स्वाभिमान हो।
बड़ों का सम्मान करे,छोटों को दे दुलार,
सच्ची विद्या वही है,जो बदले यह संसार।
ज्ञान से चमकते हैं,सफलता के द्वार यहाँ,
संस्कार से महकता है,व्यक्ति का व्यवहार यहाँ।
शिक्षा दे पंख हमें,उड़ने को आसमान में,
संस्कार ही रखते हैं,थामे धरती के भान में।
आओ मिलकर दीप जलाएं,शिक्षा-संस्कार का,
यही एक मार्ग है,सुंदर नए संसार
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