गाँव का दंगल

 गांव-गांव में बजा नगाड़ा, आया है चुनाव,

किसकी होगी जीत यहा पे, किसका डूबेगी नाव।

गली-मोहल्ले,चौपालों पर छिड़ी हुई है बात,

किसके सिर पर सजेगा सेहरा,कौन सहेगा मात।

​भाषण लंबे-लंबे देगे, बोलेगे मीठे बोल,

"हमें जिताओ, हम बदलेंगे तस्वीर गांवो की।"

कोई पहने कॉटन कुर्ता, कोई रेशमी साड़ी, 

गांव का दंगल सजा है देखे दुनिया सारी

हाथ जोड़कर झुके पड़े हैं,नेता जी हर द्वार,

कहते हैं बस एक बार जी,दे दो अपना प्यार।

​"सड़क बनेगी शीशे जैसी,पानी आएगा रोज़,

नाली खड़ंजा सब सुधरेंगे, कर देंगे सभी मोज।"

चाय-पकौड़े खूब बांटेंगे, प्रलोभन की होगी बात,

सोच-समझकर वोट देना,रखना इतनी बात।

​लोभ-लालच में आकर भैया, मत खोना ईमान,

ऐसे चुनना सरपंच को,जो गांव की बढ़ाए शान।

जो सुख-दुख में साथ खड़ा हो,करे न कभी कपट,

गांव का विकास करे जो, मिटा के सारे खटपट।

​बटन(पर्ची) दबाना सोच-समझकर, मत करना भूल-चूक,

सच्चे नेता को ही चुनना, यही सही है तुक।

पंच परमेश्वर बने जो सच्चा, वही संभाले गाँव,

तभी बढ़ेगी अपनी तरक्की, तभी मिलेगी छांव।

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